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दायरा

रोज़ बढ़ता हूँ जहाँ से आगे फिर वहीं लौट के आ जाता हूँ बारहा तोड़ चुका हूँ जिन को इन्हीं दीवारों से टकराता हूँ रोज़ बसते हैं कई शहर नये रोज़ धरती में समा जाते हैं ज़लज़लों में थी ज़रा सी गिरह वो भी अब रोज़ ही आ जाते हैं जिस्म से रूह तलक रेत ही रेत न कहीं धूप न साया न सराब कितने अरमाँ है किस सहरा में कौन रखता है मज़ारों का हिसाब नफ़्ज़ बुझती भी भड़कती भी है दिल का मामूल है घबराना भी रात अँधेरे ने अँधेरे से कहा इक आदत है जिये जाना भी क़ौस एक रंग की होती है तुलू'अ एक ही चाल भी पैमाना भी गोशे गोशे में खड़ी है मस्जिद मुश्किल क्या हो गई मयख़ाने की कोई कहता था समंदर हूँ मैं और मेरी जेब में क़तरा भी नहीं ख़ैरियत अपनी लिखा करता हूँ अब तो तक़दीर में ख़तरा भी नहीं अपने हाथों को पढ़ा करता हूँ कभी क़ुरान कभी गीता की तरह चंद रेखाओं में समाऊँ मैं ज़िन्दगी क़ैद है सीता की तरह राम कब लौटेंगे मालूम नहीं काश रावन ही कोई आ जाता - कैफ़ी आज़मी

दो-पहर

ये जीत-हार तो इस दौर का मुक्द्दर है ये दौर जो के पुराना नही नया भी नहीं ये दौर जो सज़ा भी नही जज़ा भी नहीं ये दौर जिसका बा-जहिर कोइ खुदा भी नहीं [जज़ा = rewards ],[बा-जहिर = evidently ] तुम्हारी जीत अहम है ना मेरी हार अहम के इब्तिदा भी नहीं है ये इन्तेहा भी नहीं शुरु मारका-ए-जान अभी हुआ भी नहीं शुरु तो ये हंगाम-ए-फ़ैसला भी नहीं [इब्तिदा = beginning] ,[इन्तेहा = end],[मारका-ए-जान = battle for life ] [हंगाम-ए-फ़ैसला = commotion before the verdict] पयाम ज़ेर-ए-लब अब तक है सूर-ए-इसराफ़ील सुना किसी ने किसी ने अभी सुना भी नहीं किया किसी ने किसी ने यकीं किया भी नहीं उठा जमीं से कोई, कोई उठा भी नहीं [पयाम = message], [ज़ेर-ए-लब = on the lips] [सूर-ए-इसराफ़ील=according to the islamic theology,Israafil is one of the angels who would call the dead to life on the day of judgement by sounding a loud alarm. It is believed that everyone would get up from their graves and elsewhere after hearing this alarm. ] कदम कदम पर दिया है रहज़नों ने फ़रेब के अब निगाह मे तौकीर-ए-रहनुमा भी नहीं उसे समझते है मंजिल जो रास्ता भ...
सुना करो मेरी जान इन से उन से अफ़साने [अफ़साने(fiction) = कल्पित कथा] सब अजनबी है यहाँ कौन किसको पहचाने यहाँ से जल्दी गुज़र जाओ काफिले वालों [क़ाफ़िले (caravan )] है मेरी प्यास के फूके हुये ये वीराने मेरी जूनून-ए-परस्तिश से तंग आ गए लोग [जूनून( frenzy) = सनक] [परस्तिश(worship) = पूजा] सूना है बंद किये जा रहे है बुत-खाने [ बुत - खाने (idol temple) = मंदिर] जहाँ से पिछले पहर कोई तशना -काम उठा [तशना-काम( thirsty) = प्यासा] वहीं पर तोड़े है यारों ने आज पैमाने बहार आये तो मेरा सलाम कह देना मुझे तो आज तलब कर लिया है सेहरा ने [तलब(called for)] [सेहरा(desert)= मरुस्थल] हुआ है हुक्म के कैफी को संग-सार करो [संग-सार(stoning)= पत्थरो से मारना] मशिह बैठे हैं छुप के कहॉ खूदा जाने [मशिह( messiah)= मसीहा] - कैफ़ी आज़मी

पशेमानी

मैं ये सोच कर उस के दर से उठा था के वो रोक लेगी मना लेगी मुझको कदम ऐसे अंदाज से उठ रहे थे के वो आवाज़ देकर बुला लेगी मुझको हवाओं मे लहराता आता था दामन के दामन पकड़ के बैठा लेगी मुझको मगर उस ने रोका, ना मुझको मनाया ना अवाज़ ही दी, ना वापस बुलाया ना दामन ही पकड़ा, ना मुझको बिठाया मैं आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ता ही आया यहाँ तक के उस से जुदा हो गया मैं - कैफ़ी आज़मी