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कहीं जाना नहीं है..

कहीं जाना नहीं है बस यूँ ही सड़कों पे घूमेंगे कहीं पर तोड़ेंगे सिगनल किसी की राह रोकेंगे कोई चिल्ला के गाली देगा कोई 'होर्न' बजायेगा! ज़रा एहसास तो होगा कि ज़िन्दा हैं हमारी कोई हस्ती है !! -- गुलज़ार

आदमी बुलबुला है पानी का

आदमी बुलबुला है पानी का, और पानी की बहती सतह पर, टूटता भी है, और डूबता भी है, फिर उभरता है, फिर से बहता है, न समंदर निगल सका इसको, वक्त की मौज पर सदा बहता; आदमी बुलबुला है पानी का! -गुलज़ार
नज़्म उलझी हुई है सीने में मिसरे अटके हुए हैं होठों पर उड़ते-फिरते हैं तितलियों की तरह लफ़्ज़ काग़ज़ पे बैठते ही नहीं कब से बैठा हूँ मैं जानम सादे काग़ज़ पे लिखके नाम तेरा बस तेरा नाम ही मुकम्मल है इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी -गुलज़ार

गुनाह

सब्र हर बार इख्तियार किया हम से होता नही, हज़ार किया आदतन तुमने कर लिये वादे आदतन हमने भी ऐतबार किया हमने अक्सर तुम्हारी राहों मे रुक के अपना ही इन्तज़ार किया फिर ना मांगेगे ज़िन्दगी अब ये गुनाह हमने एक बार किया -गुलज़ार

आनंद

मौत तू एक कविता है, मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको डूबती नब्ज़ों में जब दर्द को नींद आने लगे ज़र्द सा चेहरा लिये जब चांद उफक तक पहुचे दिन अभी पानी में हो, रात किनारे के करीब ना अंधेरा ना उजाला हो, ना अभी रात ना दिन जिस्म जब ख़त्म हो और रूह को जब साँस आऐ मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको -गुलज़ार(आनंद फ़िल्म से)

अफ़साने

खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने मे एक पुराना खत खोला अनज़ाने मे जाना किसका जिक्र है अफ़साने मे दर्द जब मज़े लेता है जो दुहराने मे शाम के साये बालिस्तो से नापे हैं चाँद ने कितनी देर लगा दी आने मे रात गुज़रते शायद थोड़ा वक्त लगे ज़रा सी धूप दे उन्हे मेरे पैमाने में दिल पर दस्तक देने ये कौन आया है किसका आहट सुनता है वीराने मे । -गुलज़ार